Umesh Pal Murder Case: उत्तर प्रदेश को हिलाकर रख देने वाले प्रयागराज के चर्चित उमेश पाल हत्याकांड में माफिया डॉन अतीक अहमद के परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को, सेशन कोर्ट ने इस मामले में साजिश रचने के आरोपी, अतीक अहमद के बड़े बेटे उमर अहमद (Umar Ahmed) को एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उमर की जमानत याचिका को खारिज (Bail Plea Rejected) कर दिया, जिससे यह साफ हो गया है कि उसे फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
क्या थी उमर की दलील? “घटना के वक्त मैं जेल में था…”
उमर अहमद के वकील ने अदालत के सामने यह मजबूत दलील दी थी कि उसका उमेश पाल हत्याकांड से कोई लेना-देना नहीं है और उसे इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है।
- दलील: वकील ने तर्क दिया कि जिस दिन, यानी 24 फरवरी 2023 को, प्रयागराज में उमेश पाल की हत्या हुई, उस वक्त उमर लखनऊ की जेल में बंद था। इसलिए, उसका इस हत्याकांड में सीधे तौर पर शामिल होना असंभव है।
- निर्दोष होने का दावा: उमर ने खुद को पूरी तरह से निर्दोष बताते हुए जिला न्यायालय से जमानत की गुहार लगाई थी और कहा था कि इस हत्याकांड में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत? “अपराध की गंभीरता को देखते हुए…”
सरकारी वकील ने उमर की जमानत का पुरजोर विरोध किया और अदालत को बताया कि भले ही उमर घटना के समय जेल में था, लेकिन उस पर इस हत्याकांड की साजिश रचने (Conspiracy) का गंभीर आरोप है।
- आरोप: आरोप है कि उमर ने जेल के अंदर से ही उमेश पाल की हत्या की पूरी साजिश में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- कोर्ट का फैसला: दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने के बाद, सेशन कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी) राम प्रताप सिंह राणा की अदालत ने अपराध की गंभीरता और मामले के संवेदनशील स्वरूप को देखते हुए उमर अहमद को जमानत देने से इनकार कर दिया।
क्या था उमेश पाल हत्याकांड?
24 फरवरी, 2023 को प्रयागराज के धूमनगंज थाना क्षेत्र के जयंतीपुर इलाके में, बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह, उमेश पाल और उनके दो सरकारी गनरों की दिनदहाड़े बम और गोलियों से भूनकर नृशंस हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड का आरोप माफिया अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ, बेटे असद (जो एनकाउंटर में मारा गया) और उसके गैंग के सदस्यों पर लगा था। बाद में, पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि इस हत्याकांड की साजिश में अतीक के जेल में बंद बेटों, उमर और अली, की भी संलिप्तता थी।
उमर अहमद की जमानत याचिका का खारिज होना अतीक अहमद के ध्वस्त हो चुके साम्राज्य और उसके परिवार पर कसते कानूनी शिकंजे का एक और बड़ा संकेत है। अब उमर को आगे की राहत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा।







