आंध्र प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए पंचायत और मंडल स्तर के चुनावों के बाद, राज्य चुनाव आयोग (State Election Commission – SEC) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कई इलाकों को राहत दी है। बुधवार को जारी एक आदेश में, राज्य चुनाव आयुक्त नीलम साहनी ने कोंडापी और कडियपुलंका ग्राम पंचायतों सहित तीन मंडलों से आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct – MCC) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के कारण यह कदम उठाया गया है, जिससे अब इन क्षेत्रों में रुके हुए विकास कार्यों और नई सरकारी घोषणाओं का रास्ता साफ हो गया है।
कहां-कहां हटी आचार संहिता?
राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, निम्नलिखित क्षेत्रों से आदर्श आचार संहिता को समाप्त कर दिया गया है:
- कोंडापी ग्राम पंचायत: यह पंचायत प्रकाशम जिले के कोंडापी मंडल के अंतर्गत आती है।
- कडियपुलंका ग्राम पंचायत: यहां पूर्वी गोदावरी जिले में सरपंच पद के लिए चुनाव संपन्न हुए हैं।
- तीन मंडल परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र (MPTC):
- रामकुप्पम मंडल (चित्तूर जिला)
- करेंपुडी मंडल (पलनाडु जिला)
- विदावलुरु मंडल (नेल्लोर जिला)
इन सभी स्थानों पर चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने के बाद, 28 जुलाई से लागू आचार संहिता को हटा लिया गया है। आचार संहिता हटने का मतलब है कि अब यहां स्थानीय प्रशासन और सरकार विकास से जुड़ी नई परियोजनाएं शुरू कर सकती है और मंत्री व अधिकारी आधिकारिक दौरे और घोषणाएं कर सकते हैं।
लेकिन, इन दो डिवीजनों में अभी भी रहेगी सख्ती
हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह राहत पूरे राज्य के लिए नहीं है। दो प्रमुख राजस्व डिवीजनों में आदर्श आचार संहिता अभी भी सख्ती से लागू रहेगी।
- पुलिवेंदुला राजस्व डिवीजन
- कडप्पा राजस्व डिवीजन
आयोग के अनुसार, इन क्षेत्रों में आचार संहिता लागू रहने का कारण यह है कि पुलिवेंदुला और वोंटीमिट्टा में अभी भी जिला परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (Zilla Parishad Territorial Constituencies – ZPTC) के लिए चुनाव प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। इन चुनावों के संपन्न होने तक, इन डिवीजनों में कोई भी राजनीतिक दल या सरकार ऐसी कोई घोषणा या कार्य नहीं कर सकती जो मतदाताओं को प्रभावित कर सके।
क्या होती है आदर्श आचार संहिता?
आदर्श आचार संहिता चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए नियमों का एक समूह है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों पर लागू होता है। इसके लागू होने के बाद, सरकार कोई नई योजना या अनुदान की घोषणा नहीं कर सकती और सरकारी मशीनरी का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे हटा लिया जाता है।
यह फैसला आंध्र प्रदेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सफल समापन की दिशा में एक और कदम है, जिससे अब चुने हुए प्रतिनिधि बिना किसी बाधा के अपने क्षेत्रों में काम शुरू कर सकते हैं।







