Sarkari Yojana: बिहार की महिलाओं के लिए सुनहरा मौका! ‘जीविका दीदी’ बनकर बनें आत्मनिर्भर, सरकार दे रही है पैसा।
बिहार में इन दिनों ‘जीविका दीदी’ (Jeevika Didi) शब्द चारों ओर गूंज रहा है। विधानसभा चुनावों के मौसम में, हर राजनीतिक दल महिलाओं के इस शक्तिशाली समूह को लुभाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ जहां नीतीश सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत जीविका दीदियों को स्वरोजगार के लिए ₹10,000 से लेकर ₹2 लाख तक की आर्थिक मदद दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर RJD नेता तेजस्वी यादव ने सरकार में आने पर जीविका दीदियों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देकर उनका वेतन ₹30,000 प्रति माह करने का बड़ा ऐलान किया है।
इन घोषणाओं के बाद, बिहार की लाखों महिलाओं के मन में यह सवाल है कि आखिर ‘जीविका दीदी’ कैसे बनें? इससे जुड़ने के क्या फायदे हैं और इसके लिए फॉर्म कैसे और कहां भरा जाएगा? आइए, जानते हैं इसका पूरा प्रोसेस।
क्या है ‘जीविका’ और कौन हैं ‘जीविका दीदी’?
‘जीविका’ असल में बिहार ग्रामीण आजीविका मिशन (Bihar Rural Livelihoods Mission) का लोकप्रिय नाम है। इसकी शुरुआत साल 2006 में विश्व बैंक (World Bank) की मदद से की गई थी।
- उद्देश्य: इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के छोटे-छोटे स्वयं सहायता समूह (Self-Help Groups – SHGs) बनाकर उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
- जीविका दीदी: इन्हीं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने वाली महिलाओं को सम्मानपूर्वक ‘जीविका दीदी’ कहा जाता है।
वर्तमान में, बिहार में 1 करोड़ 40 लाख के करीब महिलाएं इन जीविका समूहों से जुड़ी हुई हैं और आत्मनिर्भरता की एक नई कहानी लिख रही हैं।
जीविका दीदी बनने के क्या हैं फायदे?
- आर्थिक सहायता: नीतीश सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत, जीविका दीदियों को अपना काम शुरू करने के लिए ₹10,000 की पहली किस्त और बाद में ₹2 लाख तक की आर्थिक मदद मिल रही है।
- आसान लोन: महिला समूहों को बैंक से बहुत ही कम ब्याज पर छोटे-छोटे लोन मिलते हैं। तेजस्वी यादव ने तो यह भी वादा किया है कि सरकार में आने पर इन लोन्स को माफ कर दिया जाएगा।
- बाजार तक पहुंच: सरकार द्वारा आयोजित किए जाने वाले ‘सरस मेला’ जैसे आयोजनों में जीविका दीदियों को अपने हाथ से बने उत्पादों (जैसे- अचार, पापड़, हैंडीक्राफ्ट्स) को बेचने के लिए एक बड़ा बाजार मिलता है।
- मानदेय और स्थायी नौकरी का अवसर: जीविका योजना के तहत ‘दीदी की नर्सरी’, ‘ड्रोन दीदी’, और ‘बैंक सखी’ जैसे कई पद भी बनाए गए हैं, जिनके लिए सरकार की ओर से मानदेय भी मिलता है। तेजस्वी यादव ने इन्हीं में से ‘सीएम दीदी’ जैसे पदों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने का वादा किया है।
कैसे बनें जीविका दीदी? जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया
अगर आप भी ‘जीविका दीदी’ बनकर इन सभी फायदों का लाभ उठाना चाहती हैं, तो इससे जुड़ने की प्रक्रिया बहुत ही सरल है।
अगर आप गांव में रहती हैं:
- आपको अपने गांव में काम कर रहे ग्राम संगठन (Village Organization) के ऑफिस जाना होगा।
- वहां आपको जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए एक आवेदन फॉर्म भरना होगा।
- फॉर्म के साथ, आपको एक शपथ पत्र (Affidavit) भी जमा कराना होगा।
- इसके बाद ग्राम संगठन आपके आवेदन का वेरिफिकेशन करेगा और मंजूरी देगा। आगे की पूरी प्रक्रिया की जानकारी भी आपको वहीं से मिल जाएगी।
अगर आप शहर में रहती हैं:
- शहरी क्षेत्रों की महिलाएं जीविका के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं।
- इसके अलावा, आप अपने क्षेत्र के स्तरीय संगठन (Area Level Organization – ALO) के ऑफिस जाकर भी फॉर्म भर सकती हैं।
क्या है पात्रता? (Eligibility)
- महिला का बिहार की स्थायी नागरिक होना अनिवार्य है।
- महिला की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- महिला या उसके पति इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आने चाहिए।
- महिला खुद या उसके पति किसी भी प्रकार की सरकारी नौकरी (नियमित या संविदा) में नहीं होने चाहिए।
- एक परिवार से केवल एक ही महिला जीविका समूह से जुड़ सकती है।
यह योजना बिहार की महिलाओं के लिए न केवल आर्थिक स्वतंत्रता का द्वार खोल रही है, बल्कि उन्हें एक सामाजिक पहचान और सम्मान भी दिला रही है।







