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Mauni Amavasya 2026: इस बार है बेहद खास, जानें क्यों है यह दिन पिता-पुत्र की पूजा के लिए उत्तम

Published On: January 17, 2026
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Mauni Amavasya 2026: मकर राशि में सूर्य-चंद्रमा का मिलन, मौनी अमावस्या पर बन रहा है अद्भुत ‘पंचग्रहीय योग’, खुलेगा भाग्य का द्वार

हिंदू धर्म में माघ मास की अमावस्या तिथि, जिसे मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) कहा जाता है, का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह दिन स्नान, दान, ध्यान और सबसे महत्वपूर्ण ‘मौन व्रत’ के लिए जाना जाता है। इस बार, 18 जनवरी 2026, रविवार को पड़ने वाली मौनी अमावस्या ज्योतिष की दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली होने वाली है, क्योंकि इस दिन मकर राशि में पांच ग्रहों का महासंयोग (पंचग्रहीय योग – Panchgrahi Yog) बन रहा है, जो भाग्य परिवर्तन का एक सूक्ष्म द्वार खोलने वाला है।

यह दिन प्रयागराज में चल रहे माघ मेले (Magh Mela) का भी सबसे बड़ा स्नान पर्व होता है, जहाँ करोड़ों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करते हैं।

क्या है 18 जनवरी का अद्भुत ग्रहीय संयोग?

ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार, 18 जनवरी 2026 को ग्रहों की एक ऐसी अद्भुत युति बन रही है जो बेहद दुर्लभ है:

  • सूर्य और चंद्रमा का महामिलन: मौनी अमावस्या पर सबसे महत्वपूर्ण घटना सूर्य और चंद्रमा का एक ही राशि में मिलन होता है। इस दिन, चंद्रमा दिन में 04:39 PM पर मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही सूर्य देव विराजमान हैं।
  • मकर राशि में पंचग्रहीय योग: सिर्फ सूर्य और चंद्रमा ही नहीं, बल्कि मंगल, बुध, और शुक्र भी मकर राशि में ही गोचर कर रहे होंगे। इस प्रकार, मकर राशि में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, और शुक्र के एक साथ आने से एक शक्तिशाली ‘पंचग्रहीय योग’ का निर्माण हो रहा है।

क्यों है यह संयोग इतना शक्तिशाली?

इस पंचग्रहीय योग के कारण ब्रह्मांड में एक विशेष और शुभ ऊर्जा का उत्सर्जन होगा। मान्यता है कि इस ऊर्जा के माध्यम से भाग्य परिवर्तन के सूक्ष्म द्वार खुलते हैं, और इस दिन किया गया स्नान, दान और ध्यान कई गुना अधिक फलदायी होता है।

अन्य ग्रहों की स्थिति:

  • देवगुरु बृहस्पति: मिथुन राशि में।
  • राहु: कुम्भ राशि में।
  • केतु: सिंह राशि में।
  • शनि: मीन राशि में।

इस दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र सुबह 10:15 तक रहेगा, जिसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रारंभ होगा, जो इस दिन की शुभता को और भी बढ़ा देगा।

सूर्य और शनि का पिता-पुत्र संबंध और मौनी अमावस्या

यह जानना भी दिलचस्प है कि मौनी अमावस्या का समय मकर संक्रांति के ठीक बाद आता है।

  • पिता-पुत्र, फिर भी शत्रु: ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा और आत्मा का कारक माना गया है, जबकि शनि उनके पुत्र हैं जो न्याय और अंधकार के प्रतीक हैं। पिता-पुत्र होने के बावजूद, ज्योतिष में सूर्य और शनि को एक-दूसरे का शत्रु माना जाता है।
  • विरोधी ऊर्जाओं का मिलन: जब पिता सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि, मकर में आते हैं, तो दो विरोधी ऊर्जाओं का मिलन होता है, जिसका ब्रह्मांडीय प्रभाव समस्त चराचर जगत पर पड़ता है।
  • शनि के उपाय: शनि के दुष्प्रभावों से बचने के लिए इस दिन छाया दान (एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखकर दान करना) सबसे सरल और प्रभावी उपाय माना जाता है।

क्यों है मौनी अमावस्या पर ‘मौन’ इतना जरूरी?

मौनी अमावस्या का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘मौन व्रत’ है। इस दिन मौन धारण कर स्नान-दान करने से आत्म-बल में वृद्धि होती है, इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित होता है और व्यक्ति की आध्यात्मिक ऊर्जा जागृत होती है। मौन रहकर व्यक्ति अपनी आंतरिक चेतना से जुड़ पाता है, जो इस ग्रहीय संयोग की सकारात्मक ऊर्जा को आत्मसात करने के लिए आवश्यक है।

प्रयागराज का संगम इस दिन एक विशेष ऊर्जा क्षेत्र बन जाता है, जहाँ जल, वायु और वातावरण की दिव्यता अपने चरम पर होती है। इस अद्भुत संयोग में की गई एक डुबकी व्यक्ति के पापों का नाश कर उसे पुण्य का भागी बनाती है।

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