कुरनूल बस हादसा: बाइक, बारिश और फ्यूल टैंक… जानें कैसे हैदराबाद-बेंगलुरु हाईवे पर जिंदा जले 20 लोग
Kurnool Bus Fire: आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के कुरनूल में हैदराबाद-बेंगलुरु नेशनल हाईवे पर शुक्रवार तड़के हुआ बस अग्निकांड, जिसमें 20 लोग जिंदा जल गए, हर किसी के दिल को दहला गया है। चलती-फिरती एक लक्जरी बस कैसे पल भर में आग का गोला बन गई और उसमें सवार यात्री अपनी जान क्यों नहीं बचा पाए? इन सवालों के जवाब जैसे-जैसे सामने आ रहे हैं, वे और भी दर्दनाक और झकझोर देने वाले हैं। आइए जानते हैं उस अंधेरी रात में उस बर्निंग बस की पूरी कहानी।
क्या थी हादसे की असल वजह?
कुरनूल बस हादसे की असली और दिल दहला देने वाली वजह एक बाइक और उस पर सवार युवक बना।
- तेज बारिश और फिसलती बाइक: शुक्रवार तड़के का समय था और हाईवे पर तेज बारिश हो रही थी, जिससे सड़क काफी फिसलन भरी हो गई थी।
- बाइकर ने खोया नियंत्रण: कावेरी ट्रैवल्स की बस जिस रास्ते पर हैदराबाद की ओर जा रही थी, उसी रास्ते पर कुरनूल का एक स्थानीय युवक, शिवशंकर, अपनी बाइक तेज गति से चला रहा था। तेज बारिश के कारण वह अपनी बाइक पर नियंत्रण नहीं रख पाया।
- फ्यूल टैंक से हुई टक्कर: बाइक फिसलकर सीधे बस के अगले पहियों के नीचे आ गई और बस उसे कुछ दूर तक घसीटते हुए ले गई। बाइक सीधे जाकर बस के डीजल फ्यूल टैंक से टकरा गई।
- आग का गोला बनी बस: फ्यूल टैंक से टकराते ही एक जोरदार धमाका हुआ और बस में भीषण आग लग गई। बाइकर शिवशंकर की तो बस के नीचे आकर तुरंत ही मौत हो गई, लेकिन आग की लपटों ने पलक झपकते ही पूरी स्लीपर बस को अपनी चपेट में ले लिया।
क्यों नहीं बच पाए यात्री? ड्राइवर-कंडक्टर की सबसे बड़ी भूल!
यह हादसा सुबह करीब 3:30 बजे हुआ, जब बस में सवार लगभग 40 यात्री गहरी नींद में सो रहे थे। यहीं पर ड्राइवर और कंडक्टर की एक चूक मौत का सबसे बड़ा कारण बनी।
- यात्रियों को नहीं किया अलर्ट: बस में आग लगते ही ड्राइवर ने बस रोकी और सो रहे सहायक ड्राइवर को जगाया। दोनों ने इसे एक छोटी-सी आग समझकर बुझाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। जब उन्हें एहसास हुआ कि आग भयानक रूप ले चुकी है, तो वे दोनों यात्रियों को सचेत किए बिना ही बस से कूदकर अपनी जान बचाकर भाग गए।
- जाम हो गया दरवाजा: पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि टक्कर के कारण हुए शॉर्ट सर्किट से बस का ऑटोमेटिक दरवाजा जाम हो गया था।
- नींद में ही घुट गया दम: चूंकि यह एक एसी वोल्वो बस थी, इसलिए सभी खिड़कियां और दरवाजे बंद थे। यात्री जब तक कुछ समझ पाते, तब तक जहरीला धुआं पूरी बस में भर चुका था और आग बस के अगले हिस्से को अपनी चपेट में ले चुकी थी। माना जा रहा है कि कई यात्रियों की मौत नींद में ही दम घुटने से हो गई।
कैसे बच पाए कुछ लोग?
इसी बीच, एक साहसी व्यक्ति ने किसी तरह आपातकालीन खिड़की (Emergency Window) को तोड़ दिया और बाहर कूद गया। उसे देखकर, 11 अन्य यात्री भी एक-एक करके बाहर कूदने में सफल रहे, जिन्हें मामूली चोटें आईं। लेकिन, जो यात्री बस के पिछले हिस्से में फंसे थे, वे आग और धुएं के कारण बाहर नहीं निकल पाए और चीखते-चिल्लाते हुए जिंदा जल गए।
दमकल विभाग की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अब तक 20 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। पुलिस शवों की शिनाख्त करने की कोशिश कर रही है और गैर-जिम्मेदार ड्राइवर और सहायक ड्राइवर को हिरासत में ले लिया गया है। यह दर्दनाक हादसा तेज रफ्तार, लापरवाही और सिस्टम की खामियों का एक खौफनाक उदाहरण है।







