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ISRO दौरे ने बदली झारखंड की लड़कियों की सोच, अंतरिक्ष का सपना देख बोलीं – “हम भी बन सकते हैं कलाम”

Published On: August 14, 2025
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ISRO दौरे ने बदली झारखंड की लड़कियों की सोच, अंतरिक्ष का सपना देख बोलीं - "हम भी बन सकते हैं कलाम"
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कल तक जो आंखें सिर्फ अपने छोटे से गांव की गलियां देखती थीं, आज वे अनंत आकाश में चमकते सितारों और उनसे भी आगे जाने के सपने देख रही हैं। यह असाधारण बदलाव आया है भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के एक प्रेरणादायी दौरे से, जिसने झारखंड के सुदूर गांवों की कई आदिवासी लड़कियों की जिंदगी की दिशा ही बदल दी है। बेंगलुरु स्थित इसरो मुख्यालय के अपने इस शैक्षिक दौरे के बाद, इन लड़कियों के मन में अब न केवल वैज्ञानिक बनने की ललक जगी है, बल्कि वे कहती हैं कि उन्हें अब यह विश्वास हो गया है कि वे भी मिसाइल मैन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नक्शेकदम पर चल सकती हैं।

यह दौरा सिर्फ एक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह उन हजारों सपनों के लिए एक लॉन्चपैड था जो संसाधनों की कमी और सीमित अवसरों के कारण अक्सर उड़ान भरने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।

कैसे मिला यह सुनहरा अवसर?

झारखंड के विभिन्न जिलों से चुनी गई इन प्रतिभाशाली छात्राओं को केंद्र और राज्य सरकार की एक विशेष शैक्षिक पहल के तहत इसरो का दौरा करने का अवसर मिला। इस पहल का उद्देश्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर लड़कियों के बीच रुचि जगाना और उन्हें यह दिखाना है कि अगर सपने देखने की हिम्मत हो तो कुछ भी असंभव नहीं है।

जब इन लड़कियों ने पहली बार विशाल रॉकेट, सैटेलाइट के चमकदार मॉडल देखे और देश के शीर्ष वैज्ञानिकों से सीधे बात की, तो उनकी आंखों में एक नई चमक थी। उन्होंने मंगलयान से लेकर चंद्रयान तक की भारत की गौरवशाली अंतरिक्ष यात्रा की कहानी सुनी, और यह जाना कि कैसे इसरो के वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत करके देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

“सोचा नहीं था कि हम भी यहां आ सकते हैं” – छात्राओं का अनुभव

इस दौरे में शामिल एक छात्रा, सुनीता मुर्मू ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “हमने तो रॉकेट सिर्फ किताबों में देखा था या टीवी पर। आज जब उसे अपने सामने देखा तो यकीन ही नहीं हुआ। वैज्ञानिकों ने हमें बताया कि कैसे सैटेलाइट मौसम की जानकारी देते हैं और कैसे वे हमारी पढ़ाई में मदद करते हैं। अब मेरा सपना है कि मैं भी एक वैज्ञानिक बनूं और देश के लिए काम करूं।”

एक अन्य छात्रा ने कहा, “पहले हमें लगता था कि ये सब बहुत मुश्किल है और केवल लड़के ही कर सकते हैं। लेकिन यहां आकर हमें कई महिला वैज्ञानिकों से मिलने का मौका मिला। उन्होंने हमें बताया कि लड़की होना कोई बाधा नहीं है। अगर हम मेहनत करें, तो हम भी कलाम सर जैसे बन सकते हैं।”

क्या हैं इस दौरे के मायने?

यह सिर्फ एक शैक्षिक दौरा नहीं है, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।

  • प्रेरणा और आत्मविश्वास: इसने इन लड़कियों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया है और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है।
  • रूढ़ियों को तोड़ना: यह दौरा इस रूढ़िवादी सोच को तोड़ने में मदद करता है कि विज्ञान और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र केवल लड़कों या शहरी बच्चों के लिए हैं।
  • भविष्य के लिए निवेश: आज की ये प्रेरित लड़कियां ही कल की कल्पना चावला और रितु कारीधल बन सकती हैं, जो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

यह प्रेरणादायी कहानी हमें यह याद दिलाती है कि प्रतिभा किसी क्षेत्र या लिंग तक सीमित नहीं है; उसे बस एक अवसर और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। इसरो کا یہ دورہ इन युवा मनों के लिए वह अवसर साबित हुआ ਹੈ, ਜੋ अब सितारों से आगे की दुनिया को छूने का हौसला रखते हैं।

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