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Ganesh Chaturthi:  इस शुभ मुहूर्त में करें गणेश स्थापना, जानें पूरी विधि और दुर्लभ संयोग

Published On: August 27, 2025
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Ganesh Chaturthi:  इस शुभ मुहूर्त में करें गणेश स्थापना, जानें पूरी विधि और दुर्लभ संयोग
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“गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया!” – इन्हीं जयकारों के साथ आज से पूरे देश में दस दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव (Ganeshotsav 2025) का भव्य आगाज हो गया है। गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) के इस पावन अवसर पर, भक्ति में डूबे भक्त अपने प्यारे ‘बप्पा’ का स्वागत करने के लिए घरों, मंदिरों और पंडालों में उमड़ पड़े हैं। मुंबई के विश्व प्रसिद्ध लालबागचा राजा (Lalbaugcha Raja) से लेकर देश के हर कोने में गणपति बप्पा की मनमोहक प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं, और माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया है।

देश के अलग-अलग हिस्सों से आई तस्वीरों को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि इस साल गणेशोत्सव का रंग कुछ खास और गहरा दिखाई दे रहा है।

क्या है इस बार की खास थीम? भक्ति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी

इस साल कई पूजा मंडलों ने राष्ट्रीय एकता, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता अभियान, और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक संदेशों को भी अपनी झांकी का हिस्सा बनाया है। यह दिखाता है कि यह पर्व अब सिर्फ भक्ति तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का भी एक सशक्त माध्यम बन गया है।

क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी?

वैसे तो भगवान गणेश की पूजा-अर्चना रोजाना ही की जाती है, लेकिन भादों माह प्रभु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था, जिसकी खुशी में देशभर में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है।

  • 10 दिनों तक होती है बप्पा की उपासना: इस दौरान भक्तजन घरों, दफ्तरों, दुकानों और मंदिरों में गणपति जी की मूर्ति को स्थापित करते हैं और 10 दिनों तक उनकी विधिनुसार उपासना करते हैं। इसके अलावा, प्रभु की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए उन्हें उनके पसंदीदा भोग, जैसे मोदक, मोतीचूर के लड्डू, खीर और मालपुआ, चढ़ाए जाते हैं।
  • इस साल 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है।

इस बार बना है दुर्लभ महासंयोग

इस बार की गणेश चतुर्थी ज्योतिष की दृष्टि से बेहद खास है क्योंकि इस दिन प्रीति, सर्वार्थ सिद्धि, रवि के साथ-साथ इंद्र-ब्रह्म योग का अद्भुत संयोग बना रहेगा।

  • लक्ष्मी नारायण योग: वहीं, कर्क राशि में बुध और शुक्र के एक साथ होने से लक्ष्मी नारायण योग का भी निर्माण होगा, जो धन और समृद्धि के लिए अत्यंत शुभ है।
  • बुधवार का महासंयोग: इसके अलावा, गणेश चतुर्थी पर बुधवार का पड़ना, जो स्वयं भगवान गणेश का दिन माना जाता है, इस तिथि की महत्ता को कई गुना बढ़ा रहा है।

पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने का सबसे शुभ समय मध्याह्न काल होता है, क्योंकि मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म इसी समय हुआ था।

  • पूजा मुहूर्त: वैदिक पंचांग के अनुसार, 27 अगस्त, 2025 को सुबह 11:06 बजे से दोपहर 01:40 बजे तक का समय गणेश पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा।

कैसे करें गणपति जी की स्थापना और पूजा?

  • स्थापना विधि: सबसे पहले, एक साफ-सुथरी चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। चौकी पर अक्षत, हल्दी, और कुमकुम अर्पित करें। गणपति जी की मूर्ति के दाहिनी ओर एक कलश में शुद्ध जल भरकर रखें। गणेश जी के साथ ऋद्धि-सिद्धि के स्वरूप दो सुपारियां भी स्थापित करें।
  • मंत्र जाप: स्थापना के समय ‘अस्य प्राण प्रतिष्ठां तु, अस्य प्राणा: क्षरंतु च। श्री गणपते त्वं सुप्रतिष्ठ वरदे भवेताम॥’ इस मंत्र का जाप करें।
  • पूजा: भगवान गणेश को गंगाजल से स्नान कराएं और उन्हें ताजे फूल, दूर्वा, माला, और मोदक का भोग अर्पित करें। पूजा समाप्ति पर उनकी आरती करें और गणेश चतुर्थी की कथा का पाठ करें।

गणेश मंत्र जाप

गणेश चतुर्थी 2025 पर भगवान गणेश की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से उनकी कृपा बनी रहती है:

  • ॐ गं गणपतये नमः
  • ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

यह दस दिवसीय उत्सव न केवल भक्ति का, बल्कि सामाजिक समरसता और कला का भी एक अद्भुत संगम है, जो पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोता है।

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