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Land pooling policy के खिलाफ किसानों का ‘मोटरसाइकिल मार्च’

Published On: August 11, 2025
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Land Pooling Policy के खिलाफ किसानों का 'मोटरसाइकिल मार्च'
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पंजाब की धरती एक बार फिर किसान आंदोलन (Farmer Protest) की गवाह बन रही है। राज्य सरकार की नई और विवादित ‘लैंड पूलिंग पॉलिसी 2025’ (Land Pooling Policy 2025) के खिलाफ किसानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। भले ही पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने इस नीति पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है, लेकिन किसान संगठन इससे संतुष्ट नहीं हैं। सोमवार, 11 अगस्त को, किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के बैनर तले हजारों किसानों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में विशाल ‘मोटरसाइकिल प्रोटेस्ट मार्च’ (Motorcycle Protest Marches) निकालकर अपना विरोध प्रदर्शन किया और नीति को तत्काल वापस लेने की मांग की।

क्यों सड़कों पर उतरे किसान? जानें पूरा मामला

लैंड पूलिंग नीति को “किसान और खेतिहर मजदूर विरोधी” करार देते हुए, मोटरसाइकिल पर सवार हजारों प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाकर अपनी नाराजगी जाहिर की। अमृतसर, जालंधर सहित राज्य के कई जिलों में इन विरोध मार्चों के कारण माहौल गरमा गया।

वरिष्ठ किसान नेता सरवन सिंह पंधेर (Sarwan Singh Pandher) ने इस आंदोलन का नेतृत्व करते हुए कहा, “इस नीति को लेकर कृषक समुदाय में जबरदस्त गुस्सा और नाराजगी है, फिर भी राज्य सरकार हठपूर्वक इसे जारी रखे हुए है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। आज, राज्य के अधिकांश जिलों में किसान और जीवन के अन्य क्षेत्रों से लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे, जो स्पष्ट रूप से नीति पर उनके गुस्से को दर्शाता है। हम इसका दृढ़ता से विरोध करते हैं।”

क्या है किसानों का सबसे बड़ा डर?

किसानों का आरोप है कि यह नीति उनकी उपजाऊ जमीनों को छीनने और बड़े कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने की एक सोची-समझी साजिश है।

  • सरवन सिंह पंधेर ने चेतावनी देते हुए कहा, “हम गांव-गांव जाकर लोगों को इस नीति के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक कर रहे हैं। पंजाब सरकार हमारी उपजाऊ जमीनों को छीनकर आखिरकार बड़े बिजनेस घरानों को फायदा पहुंचाना चाहती है। हम अपनी जमीन नहीं देंगे। अगर सरकार इस नीति को वापस नहीं लेती है, तो हम 20 अगस्त को जालंधर में एक विशाल प्रदर्शन करेंगे और अपने आंदोलन को और भी तेज करेंगे।”

हाईकोर्ट ने भी सरकार को लगाई फटकार

किसानों के विरोध को उस समय और बल मिला जब 7 अगस्त को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस नीति पर अंतरिम रोक लगा दी।

  • कोर्ट ने क्या कहा?: हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पाया कि यह नीति पहली नजर में “जल्दबाजी में” (in haste) अधिसूचित की गई लगती है। कोर्ट ने कहा कि नीति को अधिसूचित करने से पहले ही सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन, समय-सीमा और शिकायत निवारण तंत्र सहित सभी चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए था।
  • सरकार को दिया चार हफ्ते का समय: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नीति पर उठाई गई चिंताओं का समाधान करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होनी है।

क्या है यह विवादित लैंड पूलिंग पॉलिसी?

आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 4 जून, 2025 को लैंड पूलिंग पॉलिसी 2025 को अधिसूचित किया था। इसके तहत, सरकार विकास परियोजनाओं के लिए किसानों से स्वेच्छा से जमीन का एक पूल बनाने का प्रस्ताव रखती है, जिसके बदले में किसानों को विकसित भूमि का एक हिस्सा या मुआवजा दिया जाता है। लेकिन तब से, कई किसान संगठन और राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं और इसे वापस लेने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।


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