NIOS में दिल्ली-NCR के छात्रों की धूम! ‘ऑन-डिमांड परीक्षा’ बनी सबसे बड़ा आकर्षण, फेल छात्रों को मिल रहा दूसरा मौका
शिक्षा के क्षेत्र में एक नई और सकारात्मक क्रांति देखने को मिल रही है। दिल्ली-NCR (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) के छात्र, जिनमें वे युवा भी शामिल हैं जो CBSE, उत्तर प्रदेश बोर्ड या अन्य माध्यमिक बोर्डों में असफल हो गए थे, अब राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (National Institute of Open Schooling – NIOS) की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। नतीजा यह है कि इस साल NIOS में हुए कुल दाखिलों में दिल्ली-NCR देश भर में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
यह ट्रेंड दर्शाता है कि पारिवारिक जिम्मेदारियों या नौकरी की मजबूरियों के बावजूद, अब हर उम्र के लोग अपनी पढ़ाई को पूरा करने और अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए पहले से कहीं ज्यादा जागरूक और उत्साही हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े?
NIOS के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार:
- इस साल अब तक हुए कुल 3,15,000 दाखिलों में से, सबसे ज्यादा 57,260 छात्र दिल्ली-NCR से पंजीकृत हुए हैं।
- संस्थान में दाखिले की प्रक्रिया अभी भी जारी है, इसलिए यह संख्या और भी बढ़ सकती है।
| वर्ष | कुल दाखिले | दिल्ली-NCR से दाखिले |
| 2023 | 5,92,261 | 1,14,753 |
| 2024 | 5,04,396 | 97,041 |
| 2025 (अभी तक) | 3,15,000 | 57,260 |
यह लगातार तीसरा साल है जब दिल्ली-एनसीआर ने NIOS दाखिलों में बाजी मारी है, जो इस क्षेत्र में शिक्षा के प्रति बढ़ती ललक को दर्शाता है।
क्या है NIOS और क्यों बन रहा है यह छात्रों की पसंद?
NIOS (जिसका मुख्यालय नोएडा सेक्टर 62 में है) केंद्र सरकार का एक मान्यता प्राप्त बोर्ड है जो 5वीं से लेकर 12वीं कक्षा तक की शिक्षा ‘ओपन’ और ‘डिस्टेंस लर्निंग’ मोड में प्रदान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य उन लोगों तक शिक्षा पहुंचाना है जो पारंपरिक स्कूली प्रणाली का हिस्सा नहीं बन पाते हैं।
इसके लोकप्रिय होने के पीछे सबसे बड़ा कारण है इसकी ‘ऑन-डिमांड परीक्षा’ (On-Demand Examination – ODE) की सुविधा।
क्या है ‘ऑन-डिमांड परीक्षा’ का जादू?
यह सुविधा NIOS का सबसे बड़ा आकर्षण है, खासकर उन छात्रों के लिए जो किसी अन्य बोर्ड (जैसे CBSE या राज्य बोर्ड) से 10वीं या 12वीं की परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं।
- ‘जब आप तैयार हों, तब परीक्षा दें’: इस सुविधा का मूलमंत्र है – ‘Take the exam when you are ready’।
- कैसे करती है काम? इसके तहत, एक छात्र अपनी सुविधानुसार परीक्षा की तारीख और विषय खुद चुन सकता है। उन्हें साल भर इंतजार करने की जरूरत नहीं होती।
- फेल छात्रों के लिए वरदान: जो छात्र किसी बोर्ड में एक या दो विषयों में फेल हो जाते हैं, वे केवल उन्हीं विषयों की परीक्षा NIOS से देकर अपनी योग्यता पूरी कर सकते हैं और अपना कीमती साल बचा सकते हैं।
NIOS के अध्यक्ष, प्रोफेसर अखिलेश मिश्रा ने कहा, “संस्थान समाज के सभी वर्गों के लोगों को शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा प्रदान कर रहा है। ऑन-डिमांड परीक्षा प्रणाली छात्रों को शिक्षित होने में बहुत मदद कर रही है। सबसे ज्यादा दाखिले दिल्ली-एनसीआर से हो रहे हैं।“
समाज के हर वर्ग तक शिक्षा पहुंचाने के लिए, NIOS अब विभिन्न स्थानों और समुदायों में अपनी टीमें भेजकर काउंसलिंग भी कर रहा है, ताकि कोई भी शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।







