---Advertisement---

Sankashti Chaturthi 2025: कार्तिक माह की संकष्टी चतुर्थी कब है, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, सही विधि

Published On: November 7, 2025
Follow Us
Sankashti Chaturthi 2025: कार्तिक माह की संकष्टी चतुर्थी कब है, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, सही विधि
---Advertisement---

Sankashti Chaturthi 2025: 8 या 9 नवंबर? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

इस साल, कार्तिक मास की संकष्टी चतुर्थी की तिथि को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम है कि यह व्रत 8 नवंबर को रखा जाएगा या 9 नवंबर को। आइए, हम आपके इस कन्फ्यूजन को दूर करते हैं और जानते हैं पंचांग के अनुसार सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय।

विघ्नहर्ता भगवान गणेश (Lord Ganesha) की आराधना का विशेष दिन, संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi), हर महीने भक्तों के लिए सुख, समृद्धि और संकटों से मुक्ति का अवसर लेकर आता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। कार्तिक मास (Kartik Month) के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली इस चतुर्थी का और भी अधिक महत्व है, जिसे गणाधिप संकष्टी चतुर्थी (Ganadhipa Sankashti Chaturthi) के नाम से जाना जाता है।


कब है गणाधिप संकष्टी चतुर्थी? 8 या 9 नवंबर?

प्रत्येक चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा माना जाता है।

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 08 नवंबर, 2025, शनिवार को सुबह 07:32 बजे से।
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 09 नवंबर, 2025, रविवार को सुबह 04:25 बजे तक।

चूंकि चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय का समय 08 नवंबर, शनिवार को ही प्राप्त हो रहा है, इसलिए गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजन 08 नवंबर, 2025, शनिवार को ही किया जाएगा।

चंद्रोदय का समय (Moonrise Time):

  • 8 नवंबर को चांद निकलने का समय शाम को लगभग 07:50 PM है।

क्या है संकष्टी चतुर्थी का महत्व?

‘संकष्टी’ का अर्थ है ‘संकटों को हरने वाली’। इस दिन भगवान गणेश के ‘गणाधिप’ स्वरूप की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट, दुख और बाधाएं दूर हो जाती हैं।

  • नकारात्मक ऊर्जा होती है दूर: संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है।
  • मनोकामनाएं होती हैं पूरी: मान्यता है कि इस दिन गणपति बाप्पा अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं और उन्हें बुद्धि, विवेक और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
  • चंद्र दर्शन का महत्व: यह व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और रात में चंद्रमा के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने के बाद ही संपन्न होता है। बिना चंद्र दर्शन के यह व्रत अधूरा माना जाता है।

संकष्टी चतुर्थी की सरल और संपूर्ण पूजा विधि (Sankashti Chaturthi Puja Vidhi)

  1. सुबह का स्नान और संकल्प: प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहन लें। इस दिन लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद, हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  2. गणेश पूजन: पूजा स्थल को साफ करके एक चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
    • भगवान गणेश को गंगाजल से स्नान कराएं।
    • उन्हें रोली या सिंदूर का तिलक लगाएं, फूल, दूर्वा और जल अर्पित करें।
    • धूप और घी का दीपक जलाएं।
  3. भोग अर्पित करें: भगवान गणेश को उनका प्रिय भोग, तिल के लड्डू और मोदक, अवश्य अर्पित करें।
  4. व्रत कथा का पाठ: शाम के समय, चंद्रमा के निकलने से पहले, संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
  5. चंद्रमा को अर्घ्य दें: रात में जब चंद्रमा निकल आए, तो उन्हें दूध, शहद, चंदन और रोली मिले हुए जल से अर्घ्य दें।
  6. व्रत खोलें (पारण): चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही अपना व्रत खोलें।

इस सरल विधि से पूजा करके आप भी भगवान गणेश की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन के सभी संकटों से मुक्ति पा सकते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now