हिंदू धर्म में नवरात्रि (Navratri) का पर्व शक्ति की देवी, मां दुर्गा की उपासना का सबसे बड़ा और पवित्र त्योहार माना जाता है। हम सभी साल में आने वाली दो प्रमुख नवरात्रियों – चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि – के बारे में तो जानते ही हैं। लेकिन, इनके अलावा वर्ष में दो गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri) भी आती हैं, जो आध्यात्मिक और तांत्रिक साधना की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं।
इन्हीं में से एक है माघ मास (Magh Month) में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि। यह समय विशेष रूप से तंत्र-मंत्र, गुप्त साधना, और सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसमें सामान्य पूजा के बजाय दस महाविद्याओं (Das Mahavidyas) और मां दुर्गा के नौ रूपों की गुप्त रूप से आराधना की जाती है। वृंदावन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स के अनुसार, यह समय उन साधकों के लिए बेहद फलदायी है जो मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की गुप्त बाधाओं से मुक्ति पाना चाहते हैं।
माघ गुप्त नवरात्रि 2026 कब है (Magh Gupt Navratri Kab Hai 2026)
साल 2026 में, माघ गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व जनवरी के अंत में शुरू हो रहा है।
- प्रारंभ तिथि: 19 जनवरी 2026, सोमवार
- समापन तिथि: 27 जनवरी 2026, मंगलवार
इन नौ दिनों के दौरान, भक्त व्रत रखकर और गुप्त साधना करके मां भगवती की विशेष कृपा प्राप्त करने का प्रयास करेंगे। इसे ‘गुप्त’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें सार्वजनिक पूजा-पाठ और दिखावे के बजाय, मानसिक पूजा, मंत्र जाप और गोपनीय साधना पर अधिक जोर दिया जाता है।
नौ तिथियां और नौ देवियों की पूजा का महत्व (9 Days & Significance of 9 Goddesses)
गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के निम्नलिखित नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनका अपना-अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व है:
| तिथि | माता का नाम | पूजा का महत्व |
| प्रतिपदा (19 जनवरी) | मां शैलपुत्री | स्थिरता, शक्ति और दृढ़ता की प्रतीक। |
| द्वितीया (20 जनवरी) | मां ब्रह्मचारिणी | तप, त्याग, वैराग्य और ज्ञान की देवी। |
| तृतीया (21 जनवरी) | मां चंद्रघंटा | साहस, वीरता, और शौर्य की प्रतीक। |
| चतुर्थी (22 जनवरी) | मां कुष्मांडा | ब्रह्मांड की रचना करने वाली आदि-शक्ति। |
| पंचमी (23 जनवरी) | मां स्कंदमाता | ममतामयी और मोक्ष के द्वार खोलने वाली देवी। |
| षष्ठी (24 जनवरी) | मां कात्यायनी | विवाह की बाधाओं और भय का नाश करने वाली देवी। |
| सप्तमी (25 जनवरी) | मां कालरात्रि | शत्रुओं, नकारात्मक ऊर्जा और तंत्र-मंत्र का नाश करने वाली। |
| अष्टमी (26 जनवरी) | मां महागौरी | पवित्रता, शांति और सभी पापों का नाश करने वाली। |
| नवमी (27 जनवरी) | मां सिद्धिदात्री | सभी प्रकार की सिद्धियों, सुखों और ज्ञान को देने वाली। |
माघ गुप्त नवरात्रि 2026 के महत्वपूर्ण पूजा नियम
चूंकि यह ‘गुप्त’ नवरात्रि है, इसलिए इसके कुछ नियम भी सामान्य नवरात्रि से अलग और अधिक कठोर होते हैं:
- पूजा की गोपनीयता: इस दौरान अपनी पूजा, साधना और मनोकामना को जितना हो सके, गोपनीय रखें। दूसरों के सामने इसका बखान न करें।
- मंत्र जाप: दुर्गा सप्तशती का पाठ करना या देवी के नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ का मानसिक जाप (बिना होंठ हिलाए, मन ही मन में) करना अत्यंत शुभ और फलदायी होता है।
- सात्विक जीवन: इन नौ दिनों तक पूर्ण रूप से सात्विक आहार का सेवन करें। तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज आदि से दूर रहें।
- ब्रह्मचर्य का पालन: शारीरिक और मानसिक, दोनों ही स्तरों पर ब्रह्मचर्य का पालन करना साधना के लिए आवश्यक है।
- मन की शुद्धता: अपने मन में किसी के प्रति भी ईर्ष्या, द्वेष या क्रोध का भाव न रखें।
गुप्त नवरात्रि का यह सुनहरा अवसर भक्तों के लिए अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने और मां भगवती की विशेष कृपा प्राप्त करने का एक अनूठा माध्यम है।







