अब तक हम और आप यही मानते आए थे कि दिल की बीमारियों (Heart Diseases), खासकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक (Heart Attack and Stroke) का सबसे बड़ा दुश्मन सिर्फ कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) और हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) है। लेकिन अब, मेडिकल साइंस और कार्डियोलॉजिस्ट्स (Cardiologists) ने एक ऐसे नए, खामोश और पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक दुश्मन का खुलासा किया है, जो चुपके से हमारी नसों में घुसकर हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ा रहा है। और सबसे डरावनी बात यह है कि इस पर किसी का ध्यान ही नहीं जा रहा है।
यह नया दुश्मन है ‘माइक्रोप्लास्टिक’ (Microplastics) – यानी प्लास्टिक के बेहद छोटे-छोटे कण।
आपकी धमनियों में मिला ‘प्लास्टिक’
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दिमित्री यारानो ने एक हालिया और चौंकाने वाले शोध का हवाला देते हुए बताया है कि अब डॉक्टरों को दिल की धमनियों (Arteries) में प्लास्टिक के बहुत ही सूक्ष्म कण मिल रहे हैं।
- कैसे पहुंचाता है नुकसान?
ये प्लास्टिक के कण (जैसे पॉलिथीन और PVC के टुकड़े) सांस, पानी और पैक्ड फूड के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं। फिर ये हमारी धमनियों की दीवारों पर जमे प्लाक (Plaque) के अंदर जाकर फंस जाते हैं। - कितना बढ़ाता है खतरा?
एक स्टडी में यह पाया गया है कि जिन मरीजों की धमनियों में यह माइक्रोप्लास्टिक पाया गया, उनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक या मौत का खतरा, सामान्य लोगों की तुलना में 4.5 गुना ज्यादा देखा गया!
क्यों है प्लास्टिक इतना खतरनाक?
- सूजन को बढ़ाता है: ये प्लास्टिक कण शरीर में पहुंचकर अंदरूनी सूजन (Inflammation) को बढ़ाते हैं।
- पलाक को कमजोर करता है: ये धमनी में जमे प्लाक को अस्थिर और कमजोर बना देते हैं, जिससे वह आसानी से टूट सकता है।
- ब्लड क्लॉट बनाता है: जब प्लाक टूटता है, तो वहां पर खून का थक्का (Blood Clot) बन जाता है, जो अचानक धमनी को ब्लॉक कर देता है और यही हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बनता है।
किसे है सबसे ज्यादा खतरा?
- जिन लोगों की धमनियों में पहले से ही थोड़ा-बहुत प्लाक जमा है।
- जो लोग प्लास्टिक की बोतलों से पानी पीते हैं या पैक्ड/प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन करते हैं।
- जिनका कोलेस्ट्रॉल और बीपी कंट्रोल में होने के बावजूद दिल की समस्या बनी रहती है।
कैसे बचें इस ‘प्लास्टिक’ वाले हार्ट अटैक से? डॉक्टर ने बताए 8 जरूरी काम
हालांकि अभी तक धमनियों में जमा इन प्लास्टिक कणों को निकालने का कोई सीधा इलाज नहीं है, लेकिन डॉक्टर ने कुछ ऐसे बचाव के उपाय बताए हैं जिन्हें अपनाकर आप इस जानलेवा खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं:
1. प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करें:
प्लास्टिक की बोतलें, पैकेट, और डिस्पोजेबल कंटेनरों का इस्तेमाल तुरंत बंद या कम कर दें। कांच या स्टील के बर्तनों का उपयोग करें।
2. पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड से बचें:
पैकेट बंद और प्रोसेस्ड फूड में माइक्रोप्लास्टिक होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। ताजा और घर का बना खाना खाएं।
3. कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखें:
यह पहले से ही महत्वपूर्ण था, और अब और भी ज्यादा जरूरी हो गया है।
4. नियमित व्यायाम करें:
रोजाना एक्सरसाइज करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और धमनियां स्वस्थ रहती हैं।
5. संतुलित आहार लें:
अपनी डाइट में फल, सब्जियां और फाइबर युक्त भोजन शामिल करें, जो सूजन को कम करने में मदद करता है।
6. वजन नियंत्रित रखें:
मोटापा दिल की बीमारियों का एक प्रमुख कारण है।
7. धूम्रपान पूरी तरह से छोड़ दें:
स्मोकिंग आपकी धमनियों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती है।
8. नियमित हार्ट चेकअप कराएं:
40 की उम्र के बाद, समय-समय पर अपना हार्ट चेकअप जरूर कराएं ताकि किसी भी समस्या का शुरुआती चरण में ही पता चल सके।
क्या है भविष्य का दृष्टिकोण?
वैज्ञानिक अब इस नए खतरे को बेहतर ढंग से समझने और इसके लिए टेस्ट विकसित करने पर काम कर रहे हैं, ताकि बिना सर्जरी के ही धमनियों में मौजूद प्लास्टिक का पता लगाया जा सके।
यह शोध एक बड़ी चेतावनी है कि अब दिल की सेहत का मामला सिर्फ कोलेस्ट्रॉल और बीपी तक ही सीमित नहीं है। हमें अपने पर्यावरण और प्लास्टिक के साथ अपने संपर्क को भी गंभीरता से लेना होगा। अगर आपके सभी टेस्ट नॉर्मल हैं, फिर भी आपको दिल से जुड़ी कोई दिक्कत महसूस हो रही है, तो अपने डॉक्टर से इस नए छिपे हुए जोखिम पर भी चर्चा जरूर करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। दिल से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।







