प्रेमानंद महाराज जी ने बताया गर्म पानी वाला नुस्खा, कब्ज और पेट की गंदगी से छुटकारा, 3 दिन में साफ होंगी आंतें
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनहेल्दी लाइफस्टाइल में कब्ज (Constipation), गैस और एसिडिटी (Acidity) जैसी पेट की समस्याएं (Stomach Problems) आम हो गई हैं। अगर आपका पेट ठीक नहीं है, तो न केवल आपका मन चिड़चिड़ा रहता है, बल्कि आप किसी भी काम में ध्यान नहीं लगा पाते। आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि पेट की गड़बड़ी को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि शरीर की अधिकांश बीमारियां यहीं से शुरू होती हैं।
प्रेमानंद महाराज जी का स्पष्ट कहना है कि यदि आप भारी और गरिष्ठ भोजन (Heavy Meals) करते हैं, तो आपको इस आदत को तुरंत छोड़ देना चाहिए। ऐसा भोजन पच नहीं पाता, आंतों में जमा गंदगी (Colon Waste) सड़ने लगती है, जिससे कब्ज, गैस और एसिडिटी की परेशानी शुरू हो जाती है। पेट में गड़बड़ी से शरीर और मन दोनों कमजोर पड़ते हैं, और व्यक्ति का ध्यान साधना से भटकने लगता है।
आज हम आपको प्रेमानंद महाराज जी द्वारा बताए गए कुछ ऐसे सरल और प्रभावी उपाय (Remedies for Constipation) बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने पेट को साफ (Colon Cleansing) कर सकते हैं और आंतों में जमा पुरानी से पुरानी गंदगी को भी बाहर निकाल सकते हैं।
1. सुबह की शुरुआत ‘गरम पानी’ से करें: महाराज जी का नायाब नुस्खा
महाराज जी कहते हैं कि आपके स्वस्थ का निर्धारण आपकी सुबह की दिनचर्या से होता है। कब्ज और पेट की गंदगी से बचने के लिए, सुबह उठते ही सबसे पहला काम करें – भगवान का स्मरण और उसके बाद हल्का गर्म पानी का सेवन।
- कैसे पिएं: अपनी क्षमता के अनुसार (आधा लीटर, एक लीटर, या जितना सहजता से पी सकें), वज्रासन में बैठकर धीरे-धीरे इस गुनगुने पानी को पिएं।
- क्या हैं फायदे? महाराज जी के अनुसार, इस तरह से गर्म पानी पीने से आंतों (Intestines) में जमा कठोर और चिपचिपी गंदगी (मल) नरम होकर आसानी से बाहर निकल जाती है। इससे पाचन शक्ति बढ़ती है और आपको पेट फूलने, भारीपन और गैस जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
- वॉक है जरूरी: पानी पीने के बाद, थोड़ी देर सैर करने से शरीर सक्रिय होता है।
2. हल्का और सात्त्विक भोजन अपनाएं
प्रेमानंद महाराज जी जोर देते हैं कि भोजन का उद्देश्य सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि शरीर को प्राण-शक्ति (Life-force) देना है। इसलिए, कम, हल्का और सात्त्विक भोजन ही सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
- क्या न करें: भारी और गरिष्ठ भोजन पाचन तंत्र पर बोझ डालता है, कब्ज पैदा करता है, और मन को आलस्य व तमोगुण की ओर ले जाता है, जिससे साधना में एकाग्रता नहीं आ पाती।
- क्या करें: सुपाच्य भोजन चुनें जो आसानी से पच सके।
3. उपवास या मूंग दाल का पतला सेवन करें
अगर आप हमेशा कब्ज की समस्या से जूझते हैं, तो महाराज जी ने एक सरल तरीका बताया है जिससे पाचन तंत्र को आराम मिल सके।
- कैसे करें: दो-तीन दिनों के लिए हल्का उपवास (Fasting) करें, या केवल फलाहार (fruit diet) पर रहें।
- या फिर: अगर उपवास संभव न हो, तो केवल मूंग दाल का पतला सूप या पतली मूंग दाल का सेवन करें।
- क्यों? इससे आपके पाचन तंत्र को विश्राम मिलता है और शरीर भीतर से खुद को संतुलित कर लेता है। इस दौरान तला-भुना और मसालेदार भोजन बिल्कुल न लें।
4. इसबगोल की भूसी और त्रिफला का प्रयोग
पुरानी कब्ज से राहत पाने के लिए इसबगोल की भूसी (Isabgol Husk) और त्रिफला चूर्ण (Triphala Churna) का संयोजन बहुत फायदेमंद है।
- कैसे करें सेवन: रात को सोने से पहले, 1 चम्मच इसबगोल की भूसी को 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण के साथ एक गिलास गुनगुने दूध या गर्म पानी में मिलाकर सेवन करें।
- क्या हैं फायदे? इसबगोल में मौजूद घुलनशील फाइबर आंतों में पानी सोखकर मल को नरम और भारी बनाता है, जिससे वह आसानी से बाहर निकल जाता है। वहीं, त्रिफला चूर्ण पाचन तंत्र को मजबूत करता है और मल त्याग को नियमित रखता है।
5. भोजन करने का ‘स्वर्णिम नियम’
महाराज जी ने एक महत्वपूर्ण नियम का पालन करने की सलाह दी है: “साधक को आधा पेट भोजन, चौथाई पानी और शेष चौथाई भाग हवा के लिए खाली रखना चाहिए।” उनका कहना है कि इसी संतुलन से शरीर में सही ऊर्जा बनी रहती है और व्यक्ति भजन-साधना में एकाग्र हो पाता है।
इन उपायों को अपनाकर आप न केवल अपनी कब्ज की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं, बल्कि अपने शरीर और मन को स्वस्थ, हल्का और साधना के लिए अधिक एकाग्र बना सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। पेट से जुड़ी किसी भी गंभीर समस्या के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।







